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'वो और मैं'


वो और मैं बहुत करीब आ गए
एक-दूजे में एक-दूजे की जान समाई है !
कुछ ज्यादा ही खास रिश्ता है हममें
ना मैं और ना वो मेरे बिन रह पाई है !!
पहले कभी-कभी ही होती थी मुलाकात
अब एक पल की भी नहीं जुदाई है !
कभी दिन ही कटता था उसके साए में
अब ना जाने कितनी रातें साथ बिताई हैं !!
उसने बड़े सलीके से पहचाना मेरे दर्द को
मैनें भी उसे खुद से जुड़ी हर बात बताई है !
मेरा साया बनकर हर वक्त साथ रहती है
जमाने ने सताया, उसने वफा निभाई है !!
उसके बिना मैं जब कभी, कहीं भी गया
वो साया बनकर पीछे-पीछे चली आई है !
एक लम्हा भी तन्हां नहीं छोड़ती मुझे
ऐसी मौहब्बत भला कब किसने निभाई है !!
कौई कहता हैं इस रिश्ते को बेशर्मी,
कुछ लोग कहते हैं इसे कि बेहय्याई हैं !
मेरे जिस्म में रुह बनकर रहती है हमेशा
मेरे साथ, मेरी अपनी, वो मेरी 'तन्हाई' है !!

"वो जब मेरे पास थी"


वो जब मेरे पास थी, मेरी जीने की वजह खास थी
परेशा तन्हां-तन्हां सा रहता था उसके आने से पहले !
वो आई जिंदगी में तो महसूस हुआ मुझको
मेरे बुझते हुए जीवन में वो रोशनी की आस थी !!
उसके आते ही मानों जीने की चाह उमड़ पड़ी
जवां हो गईं उम्मीदें, जी उठे मेरे सपने सारे !
एक वो ही तो थी मेरी खुशियों की वजह
अब उसके लिए ही मेरी हर धड़कन, सांस थी !!
मेरी बात उसी पर शुरु, उसी पर खत्म होती थी
आंखों को उसके सिवा कौई नजारा मंजूर ही ना था !
दिलो-दीमाग पर मेरे हर पल वो ही छाई थी
पल्कों पर उसके ख्वाब, नजरों में उसकी प्यास थी !!
खुशियों में ही नहीं, हर गम में भी मेरे साथ थी
एक-दूजे के दिलों में रहते थे, रुह बनकर हमेशा !
कहती थी दुनिया छोड़ दूंगी, तुम्हे ना छोड़ूंगी कभी
सबसे खुशमसीब हूं मैं, इसका शास्वत एहसास थी !!
आज फिर से अकेला हूं मैं, मुझे छोड़ वो जा चुकी है
मेरे अपनो को है, मुझे उससे कौई गिला-सिकवा नहीं !
मेरी रगों में हर पल खून बनकर बहती है वो
मैने ही शायद गलात कहा "वो जब मेरे पास थी" !!